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नव ग्रह

नव ग्रह

 

सूर्यदेव :- सूर्य देव सौरमंडल के सरताज हैं और सारे ग्रहों में राजा होते हैं, इसी लिये वह जातक को उत्तम नेतृत्व क्षमता (leadership abilities) प्रदान करते हैं I इन्ही की कृपा से जातक अच्छा प्रबंधन कौशल (good management skills) हांसिल करता है I एक राजा का कर्तव्य होता है की वो अपनी प्रजा की रक्षा करे और अपराधिओं को उचित सजा दे, इसी लिये, सत्व गुण प्रधान होते हुए भी इन्हें क्रूर कहा गया है I इसी कारण राजनितिक उपक्रम में जातक को आगे बढ़ाते हैं और जातक उच्चा पद हांसिल करता है I


सूर्य आध्यात्मिक ग्रह (very spiritual planet) होने के साथ साथ हमारी आत्मा (Soul) को दर्शाते हैं I इन की उपसना करने से जातक का आध्यात्मिक विकस होता है, साथ ही हमारा आत्मविश्वास प्रबल होता है | जिन लोगों की कुंडली में यह बलवान हों या अच्छी स्थिति में हों उन लोगों में अधय्त्मिक्ता और आत्मविश्वास कूट कूट कर भरा होता है I उच्च दर्शन की धार्मिक पुस्तकों में रुचि (भागवत गीता, बाइबिल, कुरान आदि) सूर्य देव का बलवान और शुभ होना दर्शाती है I


रोज़ सुबह होते ही, बिना किसी भेद भाव के, सारे संसार को प्रकाश देने का सामाजिक कार्य करते हैं और जातक में जनता की सेवा (social service) करने की भावना तथा जन समुदाय का कल्याण करने की नियत सूर्य देव ही देते हैं |


सूर्य देव को छंद की अच्छी जानकारी होने से संगीत के क्षेत्र में जातक को काफी ज्ञान प्रदान करते हैं और जातक एक संगीतकार हो सकता है |

क्षत्रिय होने के वजह से यह तेज़ धार के हथियार जैसे तलवार आदि कई इस्तेमल में जातक को दक्ष बनाते हैं I


सूर्य जिस किसी भी जातक की कुंडली मैं वर्गउत्तम हो (राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठा हो) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठा हो) उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं I


ज्योतिष में सूर्य देव भगवन श्री शंकर को और श्री विष्णु अवतारों में श्री राम को दर्शाते हैं I


सारे राज योगों की शुरुवात सूर्य देव की कृपा से ही होती है I जिन लोगों की कुंडली में राज योग है पर वो शुरू नहीं हो रहा तो सूर्य देव की उपसना से वो संभव हो जाता है I

 

सूर्य देव, अगर आरूढ लग्न (AL) से ११ भाव के स्वामी हों या ११ भाव में बैठे हों या ११ भाव पर राशि दृष्टि रखते हों तो जातक को सरकार या पिता आदि से काफी आर्थिक लाभ होता है I


जो लोग यह जानना चाहते हैं की उन्हें सरकारी नौकरी मिलेगी या नहीं, या जो लोग व्यापारी हैं और सरकार को अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज दे कर व्यापार करना चाहते हैं उन लोगों के लिए यह बहुत अच्छी जानकारी है I

 


 

मंगल: देवों की सेना के सेनापति अवं पराक्रम, साहस, बल, रक्षा, ब्रह्मचार्य आदि के पर्याय कहलाते हैं I ये जातक को शारीरिक शक्ति प्रदान करते हैं, तथा आक्रामक एवं उत्तम योद्धा बनने के गुण देते हैं I
 
मंगल अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, अग्नि में ऊर्जा और शक्ति का निवास होता है, इसी लिये मंगल जातक को नेतृत्व क्षमता प्रदान करते हैं और जातक विभिन्न क्षेत्रो में प्रबंधक बन सकता है, यानि लीडरशिप होने के नाते वह एक उत्तम नेता के रूप में सामने आता है जो लोगों का प्रतिनिधित्व भी करता है I
 
मंगल जातक को: अग्नि को काफी बुद्धिमता से उपयोग करने का हुनर देते हैं, ऐसे लोग बहुद स्वादिष्ट भोजन पकाने में माहिर होते हैं I यज्ञ, हवन करने के लिये भी मंगल देव प्रोत्साहित करते हैं I
 
मंगल ग्रह रक्षा तथा सुरक्षा दर्शाते हैं और आत्मरक्षा की कलाएँ जैसे: मार्शल आर्ट्स, जूड़ो, कराटे, तायक्वान्दो, मुक्केबाजी मैं जातक को निपुण बनाते हैं I साथ ही साथ यह हथियारों की अच्छी समझ भी देते हैं I मंगल कि कृपा से जातक जरुरत पड़ने पर दूसरों को नियंत्रित करने की क्षमता भी रखता है I
 
जन्मपत्रिका में मंगल की उत्तम स्थिति जातक को सैनिक प्रमुख (युद्ध), पुलिस प्रमुख अवं कुशल इंजिनियर बनने में मदत कराती है I
 
मंगल ग्रह जातक को बहुत अच्छा लॉजिक (तर्क क्षमता एवं तर्कशास्त्र का ज्ञान) प्रदान करते हैं जिस से जातक किसी भी समस्या को क्रमानुसार मत्वपूर्ण भागों में विभाजित कर लेता है और फिर एक एक कर सुलझा लेता है या हल खोज लेता है I मंगल सामुद्रिक शास्त्र अवं ज्योतिष शास्त्र मैं जातक को प्रवीण बनाते हैं I
 
मंगल प्रधान व्यक्ति समय का पालन करने वाले तथा अनुशासन प्रिय होता है I मंगल ग्रह जातक को न्यायशास्त्र तथा क़ानूनी ज्ञान भी देते हैं I
 
मॉडर्न कॉर्पोरेट जगत में जातक: डायरेक्टर ऑफ़ प्रोजेक्ट्स (Dir Projects),  चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) या चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) की तरह काम कर सकता है I

 

राजनीति और वकालत जैसे प्रोफेशनस के लिये भी बलवान मंगल अच्छा होता है I मंगल देव एक डॉक्टर को उत्तम सर्जन बनते हैं I

 

मंगल जिस किसी भी जातक की कुंडली में वर्गोत्तम हो या नवांश कुंडली में त्रिकोण (1,5,9) भाव में बैठा हो उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं I

 


 

बुध (प्रिंस /राजकुमार): बुध ग्रह भू तत्त्व का प्रतिनिधित्व करता है: जो भूमि की तरह ठोस अवं पक्का, कर्म करने में कुशल अवं श्रेष्ठ उप्लबभ्दियों को दर्शाता है I


बुध एक राजसिक ग्रह है जो जातक को जूनून से व्यापार करने की कला देता है, बुध प्रभावित जातक वाणिज्य सम्बन्धी कार्यो में कुशल होते हैं I बुध जातक को सामान्य रूप से विक्री, व्यापार विकास, उत्पादन प्रबंधन, मार्केटिंग जैसे क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है I


बुध की गिनती बहुत ही उत्तम गणितज्ञ के रूप में की जाती है, बुध प्रभावी व्यक्ति सांख्यिकी, लेखा-जोखा तथा मूल्य निर्धारण में कुशल होते है I


बुध का सीधा सम्बन्ध मानवी बुद्धि से होता है जो जातक को एक अच्छा विद्यार्थी बनता है, यह जातक की बुद्धि कुशाग्र बनाता है जिससे जातक किसी भी बात को अच्छी तरह समझ पता है और भूलता नहीं, तथा सभी बातें कुशलता से याद रखने में सक्षम बनता है I


बुध का स्वभाव अस्थिर होता है जो जातक को काफी तेज़ी के साथ बदलने की क्षमता देता है इसी लिए जातक काफी विपरीत परिस्तिथितिओं मैं अनुकूल बने रह सकते हैं और काफी अलग तरह के लोगों के साथ वार्तालाप कर सकते हैं या तालमेल बना सकते हैं I


बुध ग्रह वाणी का अधिपति ग्रह है साथ ही संचार क्षेत्र से भी जुडा हुआ I बुध ग्रह एक व्यक्ति को किसी भी विषय पर बड़ी तेजी से अपने विचार सामने प्रस्तुत करने अवं ग्रहण करने की क़ाबलियत देता है, जिसके कारण व्यक्ति एक उत्तम वक्ता के रूप में सामने आता है I


यह ग्रह जातक को भाषण तथा लेखन कौशल्य प्रदान करता है, बुध प्रभावी जातक स्पष्ट बातें करने के साथ पुख्ता तौर पर विचारों को लिखित रूप मैं प्रस्तुत करने में कुशल होता है I बुध ग्रह कई भाषाओ को जानने की उपलब्धि प्रदान करता है तथा एक उत्तम शिक्षक बनाता है I


यह ग्रह स्वाभाविक हास्य की कला में निपुण होता है, ऐसे जातक बात बात में किसी को बुरा ना लगे ऐसे व्यंग या चुटकुले के माध्यम से लोगों को आकर्षित अवं आनंदित करते हैं I

यह ग्रह जातक को काफी हाज़िर जवाबी बनता है जो तर्क वितर्क मैं बहुत निपुण होता है I


बुध से प्रभावित जातक हस्याकलाकर, वास्तुशिल्पी भी बन सकते है, साथ ही नृत्य, व्यायाम तथा योग में भी प्रवीण होते हैं I


आज के मॉडर्न जमाने में यह ग्रह जातक को सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी में प्रवीणता प्रदान करता है I


बुध जिस किसी भी जातक की कुंडली मैं वर्गउत्तम हो (राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठा हो) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठा हो) उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं I

 


 

देव गुरु बृहस्पति : धी-शक्ति के अधिपति , सर्वे-व्यापकेश्वर श्री विष्णु के आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करने वले, विश्व शांति और भाईचारे के प्रतीक … ! ..परंपूज्य श्री गुरु का ऐसा विश्लेषण करना मुझे ठीक लग रहा है मित्रों..


बृहस्पति हमारे बीच धी-शक्ति, अर्थात बुद्धि का स्वामित्वा करते हैं और इसलिए हमें ज्ञान, विवेक और निर्णय लाने की क्षमता प्रदान करते हैं।


गुरु सारे विश्व में शांति और भाईचारे का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इसी तरह की सकारात्मक भावनाएं जातक को प्रदान करते हैं, ताकि: चाहे सारा विश्व विभिन्न तरह के मतभेदों से ग्रस्तो हो पर अमन, चैन और शांति का माहौल बना रहे । इन के आशिर्वाद से जातक को सर्वदा सम्मान, ज्ञान और आर्थिक पोषण मिलता रहता है ।


सृष्टि के 5 महाभूतों (५ बिल्डिंग ब्लॉक ऑफ़ क्रिएशन) के बीच यह आकाश तत्व को दर्शाते हैं, और हमारे अस्तित्व को अर्थ एवं दिशा प्रदान करते हैं ।


गुरु की कृपा से सारी जीव-आत्माएँ और सारी-जड़ आत्माएँ आपस मैं परस्पर सामनजस्य को अपना कर एक साथ निर्वास कर सकती हैं, और विश्व का पालन पोषण चलता रहता है।


उच्च कोटि के दर्शन शास्त्र में रुचि होना बृहस्पति का प्रकुर्तिक स्वाभाव होता है इसी लिये ये जातक को बहुत दार्शनिक बनाते हैं और जातक एक गहरे विचारक के रूप मैं सामने आता है।


गुरु अपने आशिर्वाद से व्यक्ति को किसी न किसी भाषा, व्याकरण और शब्दों की उत्पत्ति अवं उपयोग का बहुत उत्तम ज्ञान देते हैं ।


देवों के गुरु होने के नाते ये : सत्य के मार्ग पर चलना, धार्मिक ग्रंथों अवं पुराणिक परम्पराओं का ज्ञान जतका को प्रदान करते हैं।


बृहस्पति समाज मैं मर्यादा, धर्म और कानून का वातावरण बनाए रखते हैं, ताकि सब के लिये सम्मान से जीने योग्य माहौल बना रहे और इसी लिये ये किसी देश के कानून का उत्कृष्ट ज्ञान प्रदान करते हैं और समाज को क़ानूनी उत्तरदायित्व प्रदान करते हैं । ऐसे जातक न्यायधीश और अच्छे वकील बनते हैं।


बृहस्पति बहुत बड़ा दृष्टिकोण प्रदान करते हैं और भूगोल अवं सम्ब्नधित विषयों में व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करते हैं।


धन अवं आर्थिक समृद्धि का नैसर्गिक करक होने के नाते वह राष्ट्रीय और / या वैश्विक स्तर पर वित्त, अर्थव्यवस्था को अनुकूलन रखना अवं संसाधनों की वृद्धि और विकास का ज्ञान हमें देते हैं । जातक किसी देश के वित्त या राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय बैंक या कसी बड़ी वित्त संस्था से जुड़ा हो सकता है।


अपना ज्ञानवर्धन करते रहना, ज्ञान बांटते रहना और दूसरों को सही रास्ता दिखते रहना गुरु के उत्तरदायित्वा अवं कर्म होते हैं, इसी लिये गुरु व्यक्ति को बहुत सारे विषयों मैं अच्छा खासा ज्ञान अवं कुछ एक विषओं मैं विद्वान बनाते हैं और ऐसे व्यक्ति समाज मैं प्रोफेसर अवं धार्मिक संस्थानों में गुरु के उत्तरदायित्वा निभते हैं।


बृहस्पति जिस किसी भी जातक की कुंडली मैं वर्गउत्तम हों (राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठे हों) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठे हों) उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं ।

 


 

शनि महाराज: शनि महाराज हमारे भीतर कड़ी मेहनत और परिश्रम का प्रतिनिधित्व करते हैं I इस पूरी दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो बुद्धि, ज्ञान और मेह्नत के द्वारा प्राप्त ना करा जा सके, वे हमरे अन्दर इसी महत्वपूर्ण गुण (महेनत करने के गुण) को दर्शाते हैं | इन्ही की कृपा से हम एकाग्रचित हो कर धैर्य के साथ परिश्रम कर अपने लक्षों को प्राप्त करते हैं I


शनि हमें शारीरिक और मानसिक पीड़ा व दर्द बर्दiश करने की क्षमता देते है। जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों में जब काष्ठ और समस्याओं से जब मनुष्य घिरा होता है तो शनि महराज उसे उनसे लड़ने का बाल देते हैं I


शनि हमें सहिष्णुता और अच्छा धैर्य देता है जिसके कारण हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए लगातार दृढ़ प्रयास कर सकते हैं |


शनि महाराज का आशीर्वाद जातक को आत्म अनुशासन का गुण प्रदान करता है जिससे जातक किसी महात्मा की तरह तपस्या कर सकते हैं लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं I
शनि महाराज इनसान को हाथ का कोई ना कोई हुनर प्रदान करते हैं, जातक हाथो से चीज़े तैयार करने में माहिर होते हैं जैसे की कपड़ो की सिलाई, मिटटी के बर्तन बनाना, संगीत के उपकरण (जैसे गिटार, हर्मोनिम) बजाना आदि…. शनि प्रधान व्यक्ति एक उत्तम हस्तशिल्पी एवं अछा धनुर्धर हो सकता है |


जादूगरों को हाथ की सफाई का हुनर शनि महराज की कृपा से ही मिलता है I


प्राकृतिक रूप से शनि एक पारंपारिक ग्रह हैं जिसके कारण शनि प्रधान व्यक्ति इतिहास, प्राचीन वस्तुओं , पुरातत्त्व विभाग तथा पुराणिक कथाओ में भी विशेष रूचि लेने वाले पाए जाते हैं | शनि महाराज जातक को अपनी पारम्परिक एवं पुराणिक रीति रिवाज़ों का सम्मान कर निभाते रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं I


शनि जिस किसी भी जातक की कुंडली मैं वर्गोत्तम हों (अर्थात : राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठा हों ) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठे हों ) उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं I

 


 

राहू : भोग मार्ग का द्वारपाल, सीमाओं को तोड़ कर खोज करने का अभिलाषी, सांसारिक इच्छाओं की पूर्ती के लिए मद आचरण प्रदान करता..


हाँ मित्रों ऐसा ही है यह ग्रह राहू जो कि पारंपारिक सीमाओं को तोड़ कर आगे बढ़ने वाला ग्रह है, सभी क्षेत्रो में अज्ञात बातें/ वस्तुओं का पता लगाने की क्षमता राहू ही देता है I राहू जातक को उत्कृष्ट अनुसन्धान क्षमता प्रदान करता है, साथ ही नए विचारों को अपनाने की एवं नए विचारों को कार्यान्वित करने कि शक्ति राहू प्रदान करता है I


बलवान राहू जातक को : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, धोखा देने में तथा षड़यंत्र रचने में निपुण बनता है I साथ ही साथ जातक दूसरों के रचे षड़यंत्र को काफी सरलता से समझ सकता है I


राहु व्यक्ति को एक बहुत अच्छा राजनयिक बनता है, ऐसे जातक बहुत परिष्कृत और पॉलिश तरीके से व्यवहार करते हैं और अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं I


राहू व्यक्ति को एक अच्छा जासूस बनता है जो कि गुप्त रूप से जानकारी जुटाने में माहिर होता है, बलवान राहू युक्त जातक अपने आतंरिक भावो को दूसरों से छुपाने में माहिर होता है, ऐसे व्यक्ति अपनी बातें कभी किसी पर जाहिर नहीं होने देते और जासूसी के काम को काफी आसानी से कर पाते हैं I


जहर / खतरनाक रसायन, बड़े आधुनिक विद्युत उपकरणों का ज्ञान, परमाणु प्रौद्योगिकी का ज्ञान, भौतिक विज्ञानं का ज्ञान, धातु बनाने तथा उपयोग का ज्ञान राहू ही देता है I राहु मंत्र शास्त्र का भी उत्तम ज्ञान देता है I


राहू जिस किसी की भी जातक की कुंडली मैं वर्गउत्तम हो (राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठा हो) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठा हो) उस जातक में ऊपरोक्त लिखी कई खूबियां पाई जाती हैं I

 


 

मोक्ष करका केतु: सनातन धर्म की प्रज्ञा, सत्य का एहसास, माया का त्याग और छटी इंद्री का स्पर्श (इन्टुशन) I


हाँ मित्रों कुछ ऎसा ही अंतर्ज्ञान देता है यह ग्रह केतु I खास कर के (इन्टुशन)


जिस किसी की भी कुंडली मैं वर्गउत्तम हो (राशि चक्र और नवंशाचक्र चक्र में एक ही राशि में बैठा हो) या नवांश कुंडली में त्रिकोण (१, ५, ९ भाव में बैठा हो) उस जातक में छटी इंद्री का स्पर्श (इन्टुशन) काफी अधिक मात्र में पाया जाता है I


अगर आप का एक्सीडेंट होना है तो वहो जरूर होगा, पर बलवान केतु इस दुर्घटना की जानकारी पहले से ही आप को दे देगा I


मृत्यु लोक मैं हम लोग, पूजा अर्चन, मंत्र और प्रभु की उपासना के अलावा कर भी क्या सकते हैं ?


हाँ पर यह ज़रूर कहूँगा की जो उपासना सच्चे दिल से करता है, प्रभु उन्हें निराश नहीं करते और कुछ हद तक उनका पूर्ण संरक्षण भी करते हैं I


केतु गणित का उत्तम ज्ञान देता है, जातक उंगलिओं पर कैलकुलेटर की तरह काम कर सकता है, अंकों से जैसे उसे खेलना आता है I जोड़, बाकि, गुणा, भाग, जातक आँख मीच कर कर सकता है I


जातक मैं चीज़ों को गुप्ता रखने की कला कूट कूट कर भरी होती है, इसी लिए वह बहुत सारी जानकारी गुप्त रख सकता है I और किसी भी किसम की सीक्रेट सर्विसेज में काम कर सकता है I


पर गणेश जी के चूहे की तरह जातक चोरी करने मैं भी काफी सक्षम होता है, कहाँ से क्या चुरा ले किसी की पता भी नहीं चलता और वो अपना काम खतम कर चलता बनता है I


अगर पॉजिटिव बात करें, तो जातक चोरों की रणनीति समझने मैं काफी सक्षम होता है और डिफेन्स या पुलिस के लिये काफी अच्छा योगदान दे सकता है I


आज कल के मॉडर्न जमाने के हिसाब से केतु छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे (कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन, घड़ियां, कंप्यूटर चिप्स, सर्किट्स …) इत्यादि का अच्छा उपयोग अवं मरम्मत करने का उत्तम ज्ञान देता है I