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Dhiru Bhai Ambanai

 Dhiru Bhai Ambanai

 

Shri Dhiru Bhai Ambani

 

 

Shri Dhiru Bhai Ambanai: Is a business tycoon who changed the rules of the game of business in India. He is renowned for his bold and daring approach along with immense initiative and energy with which he used to execute his projects with success. He not only created wealth for himself but for thousand of his shareholders. His father was a school teacher and he created all his riches from scratch.

 

Let us analyze his Dashamsha Kundali (D10) to see how he used to operate in professional work environment.

 

 

Dashamsha Shri Dhiru Bhai Ambani

 

 

We can see that Lagna rising is Aquarius, Saturn is the stronger lord of the sign and is placed in 11th house of gains and profits forming Raj yoga with yog karaka Venus (lording 4th and 9th H). In Dashamsha Kundali if Lagna lord is placed in 11th house then the native can smell money and knows very well how he can generate profits ( first job of a successful business owner).

 

5th lord of management, planning and speculation (Mercury ) is placed in Lagna along with 10th lord Ketu forming another Raj Yoga in the Kundali. This placement makes him visionary Industrialist.

 

Mercury has Dig bala in Lagna and with such a placement native is very intelligent and is also blessed by Shri Kubera (dig pal or guardian of northern direction) as person has excellent sense of creating wealth and richess. Hence he could speculate and play in the share market for welfare and prosperity of his enterprise and shareholders.

 

2nd and 11th lord Jupiter has a mutual exchange yoga (parviartana yoga) with yoga karaka Venus adding a flavor of fortune in his Karmas. Also placement of benefices in 4th house ( Jupiter) along with placement of 4th lord in 11th house ( Venus), gives a clear purpose and direction to his Karmas. Such natives are very clear as to what they want to do in life. 4th is the house of gati and direction.

 

Now the focal point of this chart. => We can see that 7th house of desires and business is exalted in 3rd house of initiate, courage and daring along with 3rd lord (boldness) and 10th lord ( success and achievements) Mars, who is placed in the its own sign in Aries. Placement of two very strong Agni Tatwa planets in Agni rashi in the 3rd house makes the native go for big scale initiates and with full vigor and force, thereby making him unstoppable in his ventures.

 

 


 

श्री धीरुभाई अम्बानी :- एक महान उद्योगपति एवं व्यवसायी हैं जिन्होंने भारत में व्यापर करने के तरीके ही बदल कर रख दिए I वे अपने बुलंद इरादे, साहस और व्यावसायिक सूझभूझ में महारथ के लिये जाने जाते हैं I

 

उन्होंने कई व्यावसायिक परियोजनाओ की शुरुवात की और खुद की पूरी उर्जा अपने लक्षों की प्राप्ति में लगा, सफलता हांसिल की I

 

उन्होंने न केवल खुद की बल्कि अपने ३० लाख शएरहोल्डेर्स (भाग धारको) की भी संपत्ति में वृद्धि की I

 

उनके पिता एक स्कूल में मामूली शिक्षक थे और उन्होंने अपनी खुद की मेहनत और क़ाबलियत के दम पर अपनी सफलता का रास्ता बनाया व अपार संपत्ति का निर्माण किया I आखिरकार उन्होंने अपने नाम को अपने समय के सबसे सफल और अमीर लोगो में दर्ज कराया I

 

आइये उनकी दशांश कुंडली (D-10) का ज्योतिषी विश्लेषण करते हैं और यह देखते हैं की वो अपने व्वसाय/प्रोफेशनल या कर्मा क्षेत्र में किस तरह से काम करते थे:

 

 

Dhiru Bhai Ambani Rashi Chakra Dashamsha

 

 

जैसा की हम देख सकते हैं की, उनकी दशांश कुंडली में कुम्भ लग्न हैं एवं लग्नेश शनि व शुक्र (चतुर्थेश व नवमेश, त्रिकोण तथा केंद्र के अधिपति होते हुए) युति बनते हुए धनु राशी में ग्यारहवे भाव में स्थित हैं l ग्यारहवा भाव जातक के लाभ के बारे में दर्शाता है और शनि, शुक्र (जो की केंद्र-कोणाधिपती (योगकारक) हैं) के साथ स्थित हैं, यह एक राज योग बना रहा है I

 

किसी जातक की दशांश कुंडली में जब कभी भी हमें लग्नेश, लाभ में याने कि ग्यारहवे भाव में दिखे तब समझ लीजिये वो जातक प्रॉफ़िट्स (पैसे) कहाँ से और कैसे बनाना है अच्छी तरह जनता है I मनो जैसे वोह लाभ को भांप लेता है और उसके लिए क्या उपयुक्त कर्म करना है यह जनता है I (किसी भी सफल व्यपारी में यह गुण होना बेहद जरुरी है)

 

पंचम भाव प्रबंधन तथा नियोजन का भाव हैं और पंचमेश बुध लग्न में दशम अधिपति केतु के साथ स्थित है, जो फिर से एक राजयोग का निर्माण कर रहा हैं I पंचमेश तथा दशमेश (बुध और केतु) की लग्न में स्थिति जातक को दूरदर्शी उद्योगपति के रूप में उभारती हैं I

 

बुध लग्न में दिग्बली होने के कारण यह जातक को बहुत बुद्धिमान बना रहा हैं, साथ ही श्री कुबेर (श्री कुबेर उत्तर दिशा के दिग पाल मतलब की दिशादेवता हैं) की कृपा भी दर्शाता है और ऐसा जातक धन-धान्य को बढाने के मामले में उत्कृष्ट होता हैं I

 

इसके अलावा उन्होंने शेयर के माध्यम (५ भाव स्पेकुलेशन या सही अनुमान लगने कि क्षमता का होता है) से खुद की और भागधारको की समृद्धि की I

 

धनेश तथा लाभेश गुरु, योगकारक शुक्र के साथ परिवर्तन योग में हैं जो उनके कर्मो के लिए भाग्यदाता हैं I साथ ही केंद्र ( ४ भाव) में शुभ ग्रह की अच्छी स्थिति (गुरु), उनके कर्मो को सही गति देने के लिए अच्छा मार्ग दर्शन कर रही है I

 

ऐसे जातक जागरूक होते हैं खुद के कर्मो की उचित दशा का बोध रखते हैं , क्योंकि चतुर्थ भाव गति (डायरेक्शन) दर्शाता है I

 

अब इस कुंडली के केंद्र बिंदु पर बात करते हैं => हम देख सकते हैं सप्तमाधिपती (सूर्य) जो की जातक की वैवसाइक इच्छाए तथा व्यापर को दर्शाता हैं वह उच्च का होकर तृतीय भाव (पहल तथा पराक्रम) में तृतीयेश तथा दशमेश ( सफलता) मंगल के साथ स्थित हैं, तृतीय भाव में मंगल स्वराशी मेष में है I

 

क्योंकि मेष अग्नितत्त्व की राशी हैं और दो अग्नितत्त्व के ग्रह भी स्थित हैं ( सूर्य, मंगल ) जो की जातक को साहस, पराक्रम और हिम्मत देते हैं I ऐसे जातक बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को पूरे आत्मविश्वास और शक्ति से पूरा कर सकते हैं I

 

व्यापर में सफलता ही उनका जूनून था, जो की किसी के रोके से नहीं रुका और उन्होंने उद्योग जगत में उच्च मुकाम हासिल किया साथ ही खुद के नाम की अमिट छाप इस दुनिया पर छोड़ी I